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संत गाडगे बाबा (23 फरवरी, 1876 – 20 दिसंबर, 1956)
बीसवीं सदी के समाज-सुधार आन्दोलन में जिन महान बहुजन महापुरूषों का योगदान रहा है, उनमें से एक महान समाज सुधारक महापुरूष का नाम बाबा गाडगे जी का है। यदि ध्यान से देखा और समझा जाए, तो बाबा गाडगे तथागत बुद्ध, संत कबीर और संत रविदास जी की परंपरा एवं विचारधारा के ही वाहक नजर आते हैं।…
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रायबहादुर-मुंशी हरि प्रसाद ‘टम्टा’ (26 अगस्त,1887 – 23 फरवरी,1960)
आज 23 फरवरी को रायबहादुर-मुंशी हरि प्रसाद ‘टम्टा’ जी का स्मृति दिवस है। दिनांक 26 अगस्त, 1887 को पर्वतीय अंचल के अम्बेडकर कहे जाने वाले रायबहादुर मुंशी हरि प्रसाद टम्टा जी का जन्म बहुजन समाज के एक शिल्पकार परिवार में हुआ था। अगस्त माह में पहाड़ों में खूब हरियाली होती है और तत्समय समाज के…
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संत शिरोमणि गुरू रविदास जी (1376 ई0 – 1540 ई0)
काशी में खुशियां हुईं, हुआ जगत प्रकाश, घर- घर बाजन बाजे लगे, प्रकटे गुरु रविदास। संत शिरोमणि गुरू रविदास जी का जन्म माघ मास की पूर्णिमा को आज ही के दिन 646 वर्ष पूर्व, भारतीय मूलनिवासी बहुजन समाज के परिवार में हुआ था। वह सद्गुरू कबीर साहब के समकालीन थे। वैसे संत रविदास जी के…
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तथागत बुद्ध विहार एवं बोधिसत्व बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर प्रेरणा स्थल, ग्राम-चंदापुर, पोस्ट-गूढ़ा, जनपद रायबरेली, उ.प्र. में दिनांक 24 फरवरी(माघी पूर्णिमा), 2024 दिन शनिवार को – महान समाज सुधारक, बोधिसत्व संत शिरोमणि गुरू रविदास जी का 647वां जन्म दिवस हर्षोल्लास के साथ मनाते हुए
तथागत बुद्ध विहार एवं बोधिसत्व बाबा साहब डॉ.भीमराव आंबेडकर प्रेरणा स्थल, ग्राम-चंदापुर, पोस्ट-गूढ़ा, जनपद रायबरेली, उ.प्र. में दिनांक 24 फरवरी(माघी पूर्णिमा), 2024 दिन शनिवार को – जातिवाद, छुआछूत, ऊंच-नीच, अवैज्ञानिक आडम्बर, अंधविश्वास-पाखण्ड के विद्रोही कवि, समानता-भाईचारा, न्याय पर आधारित व्यवस्था अर्थात् “बेगमपुरा राष्ट्र”-अर्थात संविधानवाद के प्रबल पक्षधर, मानवता व समतावादी सन्त, सामाजिक क्रान्ति के पुरोधा,…
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“हम भारत के लोग” “भारत का संविधान” और इसमें प्रदत्त मूल अधिकारों व कर्तव्यों, राज्य की परिभाषा, राज्य के कर्तव्य, संवैधानिक पदों की शपथ/प्रतिज्ञान आदि से अभी तक अनजान व अपरिचित हैं, इसी कारण असंवैधानिक प्रवृत्ति के लोग मनमानी कर पा रहे हैं। असंवैधानिक प्रवृत्ति के लोग हम भारत के लोगों के साथ कहीं पर भी मनमानी कर असंवैधानिक कृत्य न करने पाएं, इसीलिए हम भारत के लोगों को, “भारत का संविधान” के समस्त अनुच्छेदों की जानकारी देना अपरिहार्य हो गया है।
“भारत का संविधान” ‘मानवीय जीवन’ की गारंटी देता है, पर संविधान के अनुच्छेदों से अपरिचित होने के कारण हम भारत के लोग संविधान की इस मानवीय जीवन की गारंटी से वंचित रह जाते हैं।
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महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध (02 दिसम्बर, 1925 – 27 फरवरी, 2010)
महाकवि विनीत विक्रम बौद्ध जी का जन्म 02 दिसंबर, 1925 को मध्य प्रदेश के सतना जिले के सोनवर्षा गांव के पिछङे समाज (कुर्मी कृषक परिवार) में हुआ था। वह आगरा विश्वविद्यालय से परा स्नातक के बाद, मध्य प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में शिक्षक, प्रवक्ता एवं प्राचार्य के पदों पर कार्यरत रहे। वर्ष 1984 में प्राचार्य…
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मान्यवर दीना भाना जी (28 फरवरी, 1928-29 अगस्त, 2006)
जयपुर, राजस्थान में 28 फरवरी, 1928 को बामसेफ के संस्थापक सदस्य, मान्यवर दीना भाना जी का जन्म हुआ था, जिन्होंने बामसेफ संस्थापक-अध्यक्ष, मान्यवर साहब कांशीराम जी को बाबा साहब के विचारों से पहली बार अवगत कराया था। बाद में मान्यवर कांशीराम साहब ने बाबा साहब एवं बहुजन समाज में जन्में महापुरूषों के मानवतावादी विचारों को,…
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राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (28 फरवरी)
भारत का संविधान, अनुच्छेद-51क(ज)👉 “भारत के प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य होगा कि वह वैज्ञानिक दृष्टिकोण, मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करे।”🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸🌸 28 फरवरी को प्रतिवर्ष भारत में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (National Science Day) के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन भारत के महान वैज्ञानिक डॉ. सी. वी. रमन जी…
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डी. के. खापर्डे जी (13 मई, 1939 – 29 फरवरी, 2000)
बामसेफ के संस्थापको में से एक मान्यवर डी. के. खापर्डे जी का जन्म दिनांक 13 मई, 1939 को नागपुर (महाराष्ट्र) में हुआ था। उनकी पूरी शिक्षा नागपुर में ही पूरी हुई थी। पढ़ाई के बाद उन्होंने डिफेन्स में नौकरी ज्वाइन कर ली। नौकरी के दौरान जब वह पुणे में थे, तभी माननीय दीना भाना जी…
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मार्च- “मान्यवर कांशीराम साहब माह” (15 मार्च- बहुजन समाज दिवस)
जो लोग कहते हैं एक दिन किसी सामाजिक क्रांतिकारी का नाम लेने या उनके योगदान को याद करने से क्या होगा। यह एक नकारात्मक दृष्टिकोण है, इससे एक महान युग की शुरुआत होगी, आप पहला कदम तो बढ़ाईये, निश्चित ही यह एक सतत प्रक्रिया है, लेकिन यह भी निर्विवाद है कि छोटे छोटे कदमों से…