हर वर्ष 10 दिसम्बर की भांति इस वर्ष भी विश्व मानवाधिकार दिवस के अवसर पर दिनांक 10 दिसम्बर, 2025 दिन बुधवार को तथागत बुद्ध विहार एवं बोधिसत्व बाबा साहब डाॅ0 भीमराव अम्बेडकर प्रेरणा स्थल, ग्राम-चंदापुर, पोस्ट-गूढ़ा, जनपद रायबरेली, उ.प्र. का आठवाॅं स्थापना दिवस समारोह ‘‘संविधान महोत्सव’’ के रूप में बहुत ही भव्य एवं अनूठे तरीके से मनाया गया। इस सुअवसर पर तथागत बुद्ध विहार परिसर में संत शिरोमणि गुरू रविदास जी की भव्य प्रतिमा का अनावरण पूज्य भिक्खु संघ के द्वारा उपस्थित जनसमूह के मध्य किया गया। इसी पुनीत अवसर पर तथागत बुद्ध विहार परिसर में विशेष बुद्ध-प्रतीकों को अपने अंदर समाहित किये विपश्यना कक्ष व नवनिर्मित संविधान सभागार का लोकार्पण भी पूज्य भिक्खु संघ के द्वारा भव्य तरीके से किया गया। तथागत बुद्ध विहार में पहली बार चित्रित किये गये मनमोहक बुद्ध प्रतीकों जैसे सफेद हाथी, कमल, श्वेत अश्व, धम्म चक्र, बोधिवृक्ष के नीचे बैठे तथागत बुद्ध का चित्र, बुद्ध-पाद(चरण) के चित्र, बुद्ध का पंचवर्गीय भिक्खुओं के साथ सारनाथ का प्रथम धम्मोपदेश का चित्रण, बोधगया में कठिन तप व सुजाता का खीरदान का चित्रण, कुशीनगर में महापरिनिर्वाण के समय का चित्रण, भारत का संविधान की उद्देशिका आदि को परिसर में भव्य एवं अनूठे ढ़ंग से अनावरण पूज्य भिक्खु संघ की उपस्थिति में हुआ। तथागत बुद्ध विहार के आठवें स्थापना दिवस समारोह की पूर्व संध्या दिनांक 09 दिसम्बर, 2025(मंगलवार से) पर विश्वशांति की मंगल कामना हेतु विनीत विक्रम बौद्ध जी द्वारा विरचित “बुद्ध चरित (चन्द्रोदय)” का 24 घंटे अनवरत् वाद्ययंत्रों के साथ मधुर वाणी में पठन-पाठन करते हुए नवनिर्मित विपश्यना कक्ष व संविधान सभागार के सामने स्थित बोधिवृक्ष में पंचशील रंगों से युक्त बनेे चबूतरे के अंदर समस्त बुद्ध स्थलों-लुंबनी, बोधगया, सुजाता स्तूप, नालंदा, राजगीर, वेणुवन, वैशाली, श्रावस्ती, सारनाथ, पावापुरी, कुशीनगर, संत रविदास व संत कबीर की जन्मस्थली से लाये गये पवित्र अवशेषों को पूज्य भिक्खु संघ द्वारा उपस्थित उपासकों के प्रदीप-प्रज्ज्वलन के मध्य, बौद्ध पद्धति से समाहित किया गया, जो पवित्र व सुखद-दर्शनीय था। तथागत बुद्ध विहार को एक दिन पूर्व ही फूलों, झालरों, पंचशील की ध्वज पट्टिकाओं व दीपोत्सव कर मनोरम तरीके से अलंकृत किया गया था। आगन्तुक उपासकों द्वारा बहुजन समाज में जन्में सभी महापुरूषों के एक साथ क्रमशः स्थापित कतारबद्ध चित्रों पर माल्यार्पण व पुष्प अर्पित किए गए। इस संविधान महोत्सव में ‘‘भारत का संविधान’’ से संबंधित एक साथ बहुत सारे पोस्टरों की एक आकर्षक प्रदर्शनी, भारत का संविधान की प्रतिकृति व प्रतीक चिह्न लगाये गये थे, जो व्यवहारिक व संवैधानिक दृष्टि से बहुत ही महत्वपूर्ण एवं ज्ञानवर्धक थे। स्थापना दिवस समारोह व संविधान महोत्सव में बाहर से आए सम्मानित अतिथिगणों ने अपने संबोधन से उपस्थित जनसमूह को ‘‘भारत का संविधान’’ में उल्लिखित मूल अधिकारों (मानवाधिकारों) का नागरिकों के जीवन में महत्व व उनकी उपयोगिता, बहुजन महापुरुषों के मानवतावादी योगदान पर विस्तार व व्यवहारिक तरीके से समझाने का प्रयास किया। पूज्य भंते विश्ववकीर्ति जी, सदस्य आल इण्डिया भिक्खु संघ कुशीनगर, पूज्य भंते धम्मबोधि जी लखनऊ, पूज्य भंते आनंदबोधि जी बांदा, पूज्य भंते जितेंद्रवर्धन जी रायबरेली द्वारा उपस्थित उपासकों को भगवान बुद्ध एवं उनके धम्म की सुखद देशना प्रदान की गयी। मुख्य अतिथि मा0 न्यायमूर्ति वीरेन्द्र सिंह साहब, इलाहाबाद उच्च न्यायालय एवं अन्य वक्ताओं में डाॅ0 राजेन्द्र वर्मा जी प्रोफेसर लखनऊ विश्वविद्यालय, एडवोकेट महेंद्र मण्डल जी अधिवक्ता उच्च न्यायालय, श्री राजकिशोर जी खण्ड शिक्षा अधिकारी, श्री जितेंद्र राज त्यागी जी अध्यक्ष संविधान संरक्षक संघ, लखनऊ, श्री गुरूचरण वर्मा जी हैदरगढ़, श्री देवकीनंदन जी, मैनेजर, एस0बी0आई0 नई दिल्ली, मैम रेखा आर्या जी, रैना गौतम जी लखनऊ, श्री आशीष भारती जी कानपुर, आदि ने अपने-अपने वक्तव्य में ‘‘भारत का संविधान’’ एवं शिक्षा की जीवन में उपयोगिता एवं बहुजन विचारधारा तथा बहुजन महापुरुषों पर अपने-अपने तरीके से बात रखकर उपस्थित जनसमूह को अपने सारगर्भित वक्तव्य से लाभान्वित किया। मंच के सभी कार्यक्रमों का सफल संचालन श्री विशेश्वर प्रसाद जी ने किया। समारोह का मंगल आरंभ बुद्ध वंदना से व समापन भारत का संविधान की उद्देशिका को जनसमूह के साथ पढ़ाकर किया गया। इसी पुनीत अवसर पर तथागत बुद्ध विहार, चंदापुर में अतिरिक्त रूप से अध्ययनरत् सभी छोटे बच्चों द्वारा भारत का संविधान की हिंदी व अंग्रेजी में उद्देशिका, मूल अधिकारों तथा नागरिकों के संवैधानिक कर्तव्यों को मंच से मौखिक रूप में समवेत स्वर में सुनाकर सभी सम्मानित अतिथियों को गौरवान्वित कर दिया। तत्पश्चात तथागत बुद्ध विहार के संस्थापक व संरक्षक श्रद्धेय बैजनाथ-रामरती गौतम व आयोजक मंडल तथा सम्मानित जनसमूह के मध्य उपस्थित सम्मानित अतिथियों के माध्यम से निःशुल्क बैग, लेखन सामग्री, टिफिन व भारत का संविधान की उद्देशिका वितरित कर शिक्षा के प्रति सभी बच्चों को प्रोत्साहित कर बुद्ध विहारों को शिक्षा के केंद्रों के रूप में विकसित किये जाने का संदेश दिया गया। इसके साथ ही संवैधानिक विचारधारा को समर्पित न्यू प्रबुद्ध भारत कैलेण्डर-2026 का भी भव्य विमोचन कर नि: शुल्क वितरण किया गया। स्थापना दिवस समारोह के आयोजक मण्डल-2025 द्वारा संविधान मेले में आगन्तुकों के भोजन-दान के साथ-साथ संविधान मेले में भारी संख्या में पधारे स्थानीय दुकानदारों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किया गया। इस संविधान मेले में भारत का संविधान व बहुजन महापुरूषों से संबंधित पुस्तकों, फोटो फ्रेम की भी कई स्टॉल पुस्तक खरीददारी के लिए सहज रूप में उपलब्ध थे।













































